Sunday, 27 May 2012

मैंने कई बार चाहा की
तुमसे कहूँ
मुझे एक शाम सिंदूरी दे दो ......!

मैं थक चुकी हूँ ,
टुकडो में जीते हुए
मुझे एक जिंदगी पूरी दे दो ....!

आँखों में छुपा लू
मन में बसा लू
मेरे मन को स्मृतियों की मयूरी दे दो ...!

है अगर कोई बंधन
तो मुझसे कहो
काट डालू मैं वो बंधन,मुझे सिर्फ मंजूरी दे दो..... !

तुम्हारे पास है
और मैं भटक रही हूँ
तुम मुझे मेरी कस्तूरी दे दो ..!!

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