mukesh875
Tuesday, 22 May 2012
या खुदा मुज पर इतना, एहसान ओर करदे,
मेरे दफन का मेरे कफन का इंतेजांमात करदे,
की अब महेंगाइ में, बेवक्त मरना भी नही अच्छा,
दो-चार गुनाह्, दो-चार नमाज, हिसाब सब तमाम करदे,
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