यूँ ही तन्हाइ में हम दिल को सजा देते हे,
नाम लिखते हे तेरा लिखके मीता देते हे,,,,
जब भी ना-कम मुहोब्बत का कोई जिक्र करें,
लोग हँसते हे मेरा नाम बता देते हे ,
अब खुशी की कोई तरकीब ना सोचे दुनिया,
अब ये आलम हे कुछ गम ही मजा लेते हे,,
अब तसल्ली नही दी जाती मरीज-ए-गम को,
देखने वाले भी मरने की दुआ देते हे,,,,,
अब तसल्ली नही दी जाती मरीज-ए-गम को,
देखने वाले भी मरने की दुआ देते हे,,,,,
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