"मैं तो झोंका हूँ.. हवा का.. उड़ा ले जाऊँगा...
जागती रहना.. तुझे तुझसे.. चुरा ले जाऊँगा ;
हो के कदमों पे निछावर .. फूल ने बुत से कहा...
ख़ाक में मिल के भी मैं .. खुश्बू बचा ले जाऊँगा ;
कौन सी शै मुझको .. पहुँचाएगी तेरे.. शहर तक...
ये पता तो तब चलेगा .. जब पता ले जाऊँगा ;
कोशिशें मुझको.. मिटाने की .. भले हों कामयाब...
मिटते-मिटते भी मैं.. मिटने का मजा.. ले जाऊँगा ;
शोहरतें.. जिनकी वजह से.. दोस्त दुश्मन हो गये...
सब यहीं रह जायेंगी ..मैं साथ क्या .. ले जाऊँगा ..."
****************** ' कुमार विश्वास '
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