Monday, 25 February 2013


 इश्क़ में जाँ से गुज़रते हैं.. गुज़रने वाले ...
मौत की राह.. नहीं देखते ... मरने वाले ;

आख़िरी वक़्त भी.. पूरा न किया वादा-ए-वस्ल ...
आप आते ही रहे .. मर गये.. मरने वाले ;

उठ्ठे और.. कूच-ए-महबूब में पहुँचे.. आशिक़ ...
ये मुसाफ़िर नहीं .. रस्ते में ठहरने वाले ;

जान देने का कहा मैंने .. तो हँसकर बोले ...
तुम सलामत रहो .. हर रोज़ के मरने वाले ;

आस्माँ पे .. जो सितारे नज़र आये 'आमीर' ...
याद आये मुझे .. दाग़ अपने .. उभरने वाले..."

****************** ' आमीर मीनाई '

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