Wednesday, 20 February 2013


किस-किस अदा से तूने.. जलवा दिखा के मारा...
आज़ाद हो चुके थे .. बन्दा बना के मारा ;

अव्वल बना के पुतला .. पुतले में जान डाली...
फिर उसको ख़ुद क़ज़ा की.. सूरत में आके मारा ;

आँखों में तेरी ज़ालिम .. छुरियाँ छुपी हुई हैं...
देखा जिधर को तूने .. पलकें उठाके मारा ;

ग़ुंचों में आके महका .. बुलबुल में जाके चहका...
इसको हँसा के मारा .. उसको रुला के मारा ;

सोसन की तरह 'अकबर'.. ख़ामोश हैं यहाँ पर...
नरगिस में इसने छिप कर.. आँखें लड़ा के मारा..."

~~~~~~~~~~~~~ ' अकबर इलाहाबादी '

अव्वल : पहले
क़ज़ा : मौत
सोसन : एक कश्मीरी पौधा

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