जो सजर सूख गया हे हरा कैसे हो,,
में पयम्बर तो नही मेरा कहा कैसे हो,,,
जिसको जाना ही नही उसको खुदा क्यूँ माने,
ओर जिसे जान चुके हे वो खुदा कैसे हो,,,,,
दूर् से देख के मैंने उसे पहचान लिया,
उसने इतना भी नही मुजसे कहा कैसे हो,,,,
वो भी एक दौर जब मैंने तुजे चाहा था,,
दिल का दरवाजा हे, हर वक्त खुला कैसे हो,,,
No comments:
Post a Comment