mukesh875
Friday, 15 February 2013
करो रक़ीब पे क्यों ज़ुल्म मैं तो हाज़िर हूँ !! गिला तुम्हारे सितम का यहाँ वहां क्यों हो ?
गिला तुम्हारे सितम का यहाँ वहां क्यों हो ?
हसरत भी है, उम्मीद भी है, आरज़ू भी है
सब कुछ मेरे नसीब में है ... एक तू नहीं
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment