mukesh875
Monday, 25 February 2013
मुजको दीवाना समजते हे तेरे शहेर के लोग,
मेरे दामन से उलजते हे तेरे शहेर के लोग,,,
की जो ख़ुद को ही जान ना पाये अब-तक,
यहा कैसे-कैसे रोग पाले हे, तेरे शहेर के लोग
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