तुम्हे दिल्लगी भुल जानी पड़ेगी,
मुहोब्बत की राहो में आ कर तो देखो,,,,
तड़प ने पे मेरे ना फिर तुम हँसोगे,
कभी दिल किसी से लगाकर तो देखो,,,,,,
तुम्हे दिल्लगी भुल जानी पड़ेगी,
मुहोब्बत की राहो में आ कर तो देखो,,,,
तड़प ने पे मेरे ना फिर तुम हँसोगे,
कभी दिल किसी से लगाकर तो देखो,,,,,,
खून रुलायेगी ये लगी दिल की,
खेल समजो ना दिल्लगी दिल की,,
वफ़ा ओ की हमसे तवक़्क़ो नही हे,
मगर एक बार आजमा कर तो देखो,
जमाने को अपना बनाकर तो देखा,
हमे भी तुम अपना बनाकर तो देखो,,,,
No comments:
Post a Comment