Friday, 11 January 2013


में रोया परदेश में भीगा माँ का प्यार,
दुःख ने दुःख से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार,
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार,
आँखों भर आकास हे बाँहों भर संसार,
लेके तन के नाप को घूमें बस्ती गांव,
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाव,
सबकी पुजा एक् सी, अलग-अलग हर रीत,
मस्जिद जाए मौलवी, कोयल गाये गीत,
पुजा घर में मूर्ति मीराँ के संग श्याम,
जिसकी जितनी चाकरी उतने उसके दाँम,
नदियां सींचें खेत को, तोता कुतरे आम,
सूरज ठेकेदार सा सब को बाँटे काम,,
सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर,
जिस दिन सोये देर तक भूखा रहे फ़कीर,
अच्छी संगत बैठकें सेंगी बदले रूप,
जैसे मिलके आम से मीठी हो गई धूप,,,
सपना जरना नींद का जागी आँखें प्यास,
पाना खोना खोजना, सांसो का इतिहास,
चाहे गीता बांचीये, या पढिये कुरान,
मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान,,,,,


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