रिसते हुए जख्मो से लहू ने,
उसे दिल में उतर ने ना दिया,
में तो मरना चहता था लेकिन,
कम-बख्त सांसो ने मरने ना दिया, mukesh joshi,,
दुःख की लहेर ने छेड़ा होगा,,,,,
याद ने कंकर फेंका होगा,,,,,,,
आज तो मेरा दिल केहता हे,
तु इस वक्त अकेला होगा,,,,
मेरे चूमे हुए हाथो से,
भौंरों को खत् लिखता होगा,,,,,
यादों की जलती शबनम से,
फुल सा मुखड़ा रोया होगा,,,,,,,,,
मोती जैसी शकल बना कर,
आयने में वो तकता होगा,,,,,,,,,
में तो आज बहोत रोया हूँ,
तू भी शायद रोया होगा,,,,,,,,
"नासिर" तेरा मीत पुराना,
तुजको याद तो आता होगा,,,,,,,,
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