Wednesday, 2 January 2013


तेरे गम को जां की तलाश थी,
तेरे जां-निसार चले गए,,,,,,,
तेरी राह् में करते थे सर तलब,
सर-ए-राह्-गुजार चले गए,,,,,,,,
ये हमीं थे जिनके लिबास पर,
सर-ए-राह् सियाही लिख्खी गइ,
ये ही दाग थे जो सजाके हम,
सर-ए-बज़्म-ए यार चले गए,,,,,,,,,,
तेरी कच अदाइ से हार के,
सब-ए-इंतज़ार चली गई,
मेरे जब्त-ए-हाल से रूठ के,
मेरे गम-गुसार चले गए,
ना सवाल-ए-वस्ल, ना अर्ज-ए-गम,
ना हिकायते, ना शीकायते,
तेरे एहेद में दिल-ए-जार की,
सारे इख्तेयार चले गए,,,,,,,,,
ना रहा जुनून-ए रुख-ए-वफ़ा,,,
ये रसम ये डार करोगे क्या,,?

तेरे गम को जां की तलाश थी,
तेरे जां-निसार चले गए,,,,,,,
तेरी राह् में करते थे सर तलब,
सर-ए-राह्-गुजार चले गए,,,,,,,,
ये हमीं थे जिनके लिबास पर,
सर-ए-राह् सियाही लिख्खी गइ,
ये ही दाग थे जो सजाके हम,
सर-ए-बज़्म-ए यार चले गए,,,,,,,,,,
तेरी कच अदाइ से हार के,
सब-ए-इंतज़ार चली गई,
मेरे जब्त-ए-हाल से रूठ के,
मेरे गम-गुसार चले गए,
ना सवाल-ए-वस्ल, ना अर्ज-ए-गम,
ना हिकायते, ना शीकायते,
तेरे एहेद में दिल-ए-जार की,
सारे इख्तेयार चले गए,,,,,,,,,
ना रहा जुनून-ए रुख-ए-वफ़ा,,,
ये रसम ये डार करोगे क्या,,?

जिन्हें  जुर्म-ए-इश्क पे नाज़ था,
वो गुनाह्-गार चले गए,,,,,,,,,,








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