दील लगाकर हम ये समजे,
जींदगी क्या चीज हे,
इश्क केहते हे किसे ओर,
आशकी क्या चीज है,
बाद मुद्दत के मिलें तुम ,
इस तरह देखा इधर ,
जिस तरह एक अजनबी,
पे अजनबी डाले नजर,
आप ने ये भी ना सोचा दोस्ती क्या चीज है, ,,,,,,,,,,,,
पेहले-पेहले आप ही अपना बना बैठे हमे,
फिर ना जाने किस लिए दिल से भुला बैठे हमे,
अब हुआ मालूम हमको बे-रुखी क्या चीज है, ,,,,,,,,,,,,,
प्यार सच्चा है मेरा तो देखा लेनी ए-सनम ,
आप आकर तोड़ देंगे ख़ुद मेरी जंजीरे गम,
बंदा परवर जान लेंगे बन्दगी क्या चीज है,,,,,,,,,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment