mukesh875
Friday, 3 August 2012
जिंदगी का ये ही चलन है, ये ही चारा है,
कदम- कदम पे आरजू ओ को हमने मारा हे,
भूलें से मुहोब्बत कर बैठा , नादां था बेचारा दिल ही तो हे, दिल ही तो हे,
हर दिल से खता हो जाती हे, बिगङो ना खुदारा दिल ही तो हे,
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