मन्नू मुनी बोले, शब्दों को तौल-तौल कर,
मौन व्रत छोड़ दीया, ख़ुद में खौल-खौल कर,
रिमोट कंट्रोल हे हाथ में, इटली वाली "माई" के
गाना चाहे तो भी गाना पाये गुण अपने सॉइ के,
भ्रष्टाचार बढ़ा हे , एक हर्फ नही हे बोला ,
महँगाई ओर बढ़ेगी , अपने मन को टटोला,
तोता जैसे रट्टा हे, अपने मालिक के शब्द,
आज तक जिव्हा नही थी, क्यू थे निश्बद,
धन्य हे कली-काल, क्या नारी युग दिखाया,
अच्छे खासे सरदार को भी रिमोट से जिसने चलाया,
असम में जो भी हो रहा हे, ये हे कुदरती घटना,
अब बांगला-देश पडोशी हे, ये हे कुदरती संरचना,
मोंगोलीया से चढ़कर मोगल आ शकते हे,
युगों तक मौन रहने का हमे मौन व्रत सीखा शकते हे,
बांगादेशी तो पडौशी हे, बे-धड़क तशरीफ़ ला शकते हे,
केहने को तो बहोत हे ,पर नही केहना अब भाइ,
जब इटली की नारी ही देश में बहु बनके आई,
पाकिस्तान की पाक भावना से मन द्रवित हो उठता हे,
उसके असीम स्नेह् से, स्नेह् प्रज्ज्वलित हो उठता हे,
उनके गुरु कसाब को, हमने कस कर हे स्नेह् में बंधा,
बीरीयाना खाए या तंदूरी हमे नही आपत्ति -नाही हे बाधा,
भ्रष्ट नही हे, "माई" के सब बच्चे हे, सच्चे.,
राम-देव या अण्णा सबके उतार देंगे कच्छे,
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