Friday, 29 June 2012

आज तुमसे दूर् होकर, ऐसे रोया मेरा प्यार,
चाँद रोया साथ मेरे, रात रोई बार-बार,
कुछ तुम्हारी बंदिशें है, कुछ हे मेरे दायरे,
जब मुकद्दर ही बने दुश्मन तो कोई क्या करे,
इस मुकद्दर पर किसीका, क्या हे आख़िर इख्तेयार,
चाँद रोया साथ मेरे...............
हर तमन्ना से जुदा में, हर खुशी से दूर् हूँ,
जी रहा हूँ , क्यू की जिने के लिए मजबूर हूँ,
मुजको मरने भी ना देगा ये तुम्हारा इंतज़ार,
चाँद रोया साथ मेरे...............

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