Friday, 15 June 2012

ठीक कहा शुशिल जी आपने,
थका दीया हे , आपको सर के अभिश्राप ने,
रावण के भी होते थे कभी दस सर,
आप के तो पता नही,
कितनो के हो आप सर,
रोज़ -रोज़ का ये नजारा हे,
कॉलेज में कई छात्रों ने पुकारा हे,
सर!!1  किसी दिन उबके ,
आप नींद में बड-बडायेंगे,
फिर भी ये ब्च्चे आपको सर ही बुलायेंगे,
आज का सर गुरु जी पे हो गया हे भारी,
ओर गुरु भी आज सर के हो गए आभारी,
शाहरुख के किसीने सर कैह् दीया,
बना बैठा ख़ुद को रा-वन,
लोगो ने भी प्रेम से कैह् दीया,जां- बन,
सर भी आज -कल खूब पढ़ें-लिख्खे हे,
क्लास में क्या नही पढ़ाना,
बा-खुबी जानते हे,
ट्यूशन जॉइंट करलो,
वर्ना सर को धोते रह जाओगे,
क्लास में जो ना पढ़ा पाया,
वो घर पे ही सिख पाओगे,
अजीब विधा ने बना दीये हे,
कॉलेज और स्कूल,
अच्छा ही था , रहने देते हम गुरुकुल,

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