मंजिले ख़ुद भटकती हे, रास्ता ढोते-ढोते,
शम्मा ख़ुद ढल जाती हे,सुबहा, होते-होते,
गम किस-किस बात का,यहा करेगा कोई,
उम्र तमाम होती हे,अपनी दास्ता रोते-रोत
कैसा ये जूनून हे, अजब रवानी-ए खून हे,
कोई गीत, जीवन बन गया,आस्था,गाते-गाते
जो सुबहा-शाम बिछ गया,तेरे आस्ता पे,
ख़ुद मझार बन गया,तेरा नक्शे-पा, पाते-पाते,
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