mukesh875
Thursday, 14 June 2012
बड़ा ही बे-असर हे,
तभी तो दर-बदर हे,
फकीरी हे एक मस्ती ,
ख़ुदमें ही खुदसे पर हे,
मुहोब्बत को हुनर कहे,
समज में कहीं कसर् हे,
उस्तादगी के "उज" को,
केहता वो कहर हे,
भीडेन्ग "दास" से क्यूँ वो,
जिनका स्वामीमे बसर हे,
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