नाज़ुक दिल हे, कोमल तन-मन,
आशा ये हे बड़ी -बड़ी,.........................
इस दुनिया में जीता हे हर -कोई,
जिंदगी मगर हे, घड़ी-दो घड़ी,...............
सागर की गहराई नापु,
आकाश की ऊँचाई,
पागल परिंदे सा ये मन,
जब भी लेता अँगड़ाई,
सारी काइनात देखके उलजे,
आँखें सबकी हे तनी-तनी,.................
अधूरे हे ख्वाब आँखों में,
जागते हे सपने रातों में,
कितने प्यासे सावन हे जेलें,
कितने मौसम् के पतजड ठेले,
लत्ता बनके रह गई जिंदगी,
पेड़ों से लिपट गई, घुली-घुली,...............
अटल मनसूबे हो जहां धरे,
जीवन के कितने थपेडे हो पड़े,
बंजर-हरियाली मन में ना धरे,
गज़ब का हौसला हे जो लड़े,
टहनी में रस की धार लिए,
कॉपल कोई फूटे जब हरी-भरी,
आशा ये हे बड़ी -बड़ी,.........................
इस दुनिया में जीता हे हर -कोई,
जिंदगी मगर हे, घड़ी-दो घड़ी,...............
सागर की गहराई नापु,
आकाश की ऊँचाई,
पागल परिंदे सा ये मन,
जब भी लेता अँगड़ाई,
सारी काइनात देखके उलजे,
आँखें सबकी हे तनी-तनी,.................
अधूरे हे ख्वाब आँखों में,
जागते हे सपने रातों में,
कितने प्यासे सावन हे जेलें,
कितने मौसम् के पतजड ठेले,
लत्ता बनके रह गई जिंदगी,
पेड़ों से लिपट गई, घुली-घुली,...............
अटल मनसूबे हो जहां धरे,
जीवन के कितने थपेडे हो पड़े,
बंजर-हरियाली मन में ना धरे,
गज़ब का हौसला हे जो लड़े,
टहनी में रस की धार लिए,
कॉपल कोई फूटे जब हरी-भरी,
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