Monday, 4 June 2012

आज बड़ा दिन हे,
बहोत सारे गधों पे वट-सावित्री ,
के व्रत के साथ पत्‍‌नी या सवार हे,
वैसे तो गधों से धोबी का नाता पूराना हे,
पर उससे कुम्हार भी कभी-क्भी जोड़ बनाता हे,
सबसे पेहले गधा अपनी पत्‍‌नी का गधा होता हे,
सारे संसार में तरहा- तरहा के गधे पड़े हे,
ओर संसार का बौज उठाने पे अड़े हे,
गांव गली रास्ता चौराहा,
पनघट, धोबीघाट, या कथीहारा,
सब के सब गधों पे निर्भर हे,
इसी लिए गधे, आज भी अजर-अमर हे,
गधे ही गुणों के सागर हे,
गधे ही प्राणी ओमे नागर हे,
कुछ -कुछ गधे तरक्की पाते हे,
तब नेता- या अभिनेता बन पाते हे,
कुछ गधे, ख़ुद को गधा केहने से शर्माते हे ,
कुछ ख़ुद को गधा ही बताते हे,
ओर घोड़ों के सामने इतराते हे,
भाइ कुछ भी कहो, अपने गधों से ही नाते हे,
गधों के तो देवी- देवता, ईश्वर भी गुण गाते हे,
कुछ गधे जो "बाबा" बन जाते हे,
सारे भक्तजनों के मन भाते हे,

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