Sunday, 30 September 2012


ओ,,,जा रे जां ओ हरजाई, देखी तेरी दिल-दारी,
दिल दे कर में कर बैठी दिल के दुश्मन से यारी
तुजको आँखों में भर के, मर गई में तुज पे मर गई,,
पत्थर की पूजा करके हारी में हारी,,जां रे
ओ  तेरे पिछे आँखें मीचे चल दी में दीवानी,
 हाये छौदके दुनिया सारी,, लोगों ने कितना समजाया ,
मेने एक ना मानी, मेरी मत गई थी मारी,
यूँ  ना कोई मरे, रब्बा खैर करे ओ,
हसी- हसी में फँस गई मेतो बे-चारी, जा रे जा,
बिन सोचे बिन जाने मेने,ओ रे ओ बेगाने,
 तुजे सौँप दीया जीवन को,
जैसे खुशबू नजर ना आए
रंग छुआ ना जाए वैसे ,

जान शकी ना तेरे मन को,
फिर भी चाहा तुजे , क्यू ना समजा मुजे,
बनके पहेली रह गई प्रित हमारी,, जां रे जां,,,




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