मै हवा हूँ, कहा वतन मेरा,,,,,,,,,,,,,,,,
दस्त मेरा ना ये चमन मेरा,,,,,,,,,,,,,,,,
नजर नजर से गुजरना कमाल होता हे,
हर एक दिल में उतरना कमाल होता हे,
बुलंदी ओ पे पहुँचना अलग हे बात मगर,
बुलंदी ओ पे ठेहरना कमाल होता हे,
बर्गे गुल पर चराग सा क्या है,
छु गया था उसे , ज़हन मेरा,,,,,,,,,,,,,,,,,
मेरी मैयत पे कोई रोया है,,,
एक नाज़नीं की मैयत ओर ,
दुश्मनों के कांधे, काँटों पे जारहा हे ,
एक फुल का जनाजा,
हीचकीया ले के ना रो , कबर पे रोने वाले,
जाग जाए ना कही, चैन से सोने वाले,
मेरी मैयत पे कोई रोया है,,,
इस लिए जल गया कफन मेरा,,,,,,,,,,,,,,
में के टूटा हुआ सितारा हूँ,,,,
अल्लाह करे ज़ुल्फ तेरी, इतनी बड़ी हो,
ख़ुद तेरी ही बला तेरी ही गार्डन में पड़ी हो,
चुम लेती हे,कभी लब तू कभी यार दीदा,
तुमने ज़ुल्फों को बहोत सर पे चढ़ा र्ख्खा हे,
अपने बालों, को तो लिल्लाह सँवारा कीजे,
हाये कंबख्त ये पीछॆ ही पड़े रेहते हे,
डस ना जाए मुजको जुल्फे कालिया,
खूब तुंने नगीने ये पालीया,
हे दोस्त साँप की मानिंद मुजसे लिपटे हुए ,
मेरा वजूद ही चंदन हे क्या किया जाए,,,,,,
तुम अगर गुलशन में जाना छोड़ दो,
तुम बाग से जब भी आते हो,,,
उतरा हुआ चेहरा होता हे,,
तुम रुख से नकाब उलटा ना करो,,
फूलों की नजर हो जाती हे
भूल जायेगी लचकना डालिया,
में के टूटा हुआ सितारा हूँ,,,,
अंजुमन -अंजुमन सुखन मेरा,,,,,,,,,,,,,
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