मेने चाँद ओर सितारों की तमन्ना की थी,
मुजकोरातों की सियाही के सिवा कूछ ना मिला
में वो नगमा हूँ जिसे प्यार की,मेहफिलनामिली,
वो मुसाफिर हूँ जिसे कोई भी मंज़िल ना मिली
जख्म पये हे बहरों की तमन्ना की थी,
किसी गेसू किसी अंचल का सहारा भी नही,
रास्ते में कोई धुँधला सा सितारा भी नही,
मेरी नजरों ने नजरों की तमन्ना कि थी,
मेरी राहो से जुदा हो गयी राहे उनकी,
आज बदली नजर आती हे निगाहे उनकी,
जिनसे इस दिल ने सहारो की तमन्ना की थी
प्यार माँगा तो सिसकते हुए, अरमान मिले,
चैन चाहा तो उमड़ते हुए तूफान मिलें
डूबते दिल ने किनारों की तमन्ना की थी
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