Sunday, 16 September 2012


सुना था के वो आयेंगे अंजुमन में,
सुना था के उनसे मुलाकात होगी ,,,,,,
हमे क्या पता था, हमे क्या खबर थी,
ना ये बात होगी, ना वो बात होगी,,,,,,,
में केहता हूँ इस दिल को दिल में बसा लो,
वो केहते हे हमसे, निगाहे मिला लो,
निगाहों को मालूम क्या दिल की हालत,
निगाहों- निगाहों में क्या बात होगी,,,,,,,,
हमे खींचकर इश्क लाया हे तेरा,
तेरे दर पे हमने लगाया हे डेरा,
हमे होगा जब-तक ना दीदार तेरा,
येही सुबहा होगी, येही रात होगी,,,,,,,,
मुहोब्बत का जब हमने छेड़ा फँसना,
तो गोर से मुखा पे आया पसीना,
जो निकले थे घर से, तो क्या जानते थे,
के यूँ धूप में आज बरसात होगी,,,,,,,,,,,,,
खफा हमसे होके वो बैठे हुए हे,
रकीबों में घिर के वो बैठे हुए हे,
ना वो देखते हे,ना हम देखते हे,
यहा बात होगी, तो क्या बात होगी,,,,,




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