मर मर के जी रहा हूँ, अच्छा हे मार दे तू, खंजर उठा के मेरे दिल में उतार दे तू,
केहती हे मेरी राहे ,तू थाम मेरी बाँहें,
दुनिया के रास्तों से, मुजको गुजार दे तु,
शफीनौ के सहारे , मिलेंगे क्या ,साहिलो किनारे, अच्छा है , इन भँवर में, मुजको उतार दे तू
रख उम्मीदें "अजल" से, वो बा-वफ़ा हमसे, बाज़ार मे जहा के , जा क्यू उधार दे तू ,
"मुकेश" अपने सर पे , तन्हाइयो का सलिब हे
अपनी मुस्ते-खाक मिटटी, उस पे नीसार दे तू
No comments:
Post a Comment