मर मर के जी रहा हूँ,
अच्छा हे मार दे तू,
खंजर उठा के मेरे,
दिल में उतार दे तू,
केहती हे मेरी राहे .
तू थाम मेरी बाँहें,
दुनिया के रास्तों से,
मुजको गुजार दे तू,
शफीनौ के सहारे,
मिलें किसे साहीलो किनारे,
अच्छा हे इन भँवर में,
मुजको उतार दे तू,
रख भरोसा "अज़ल" पे,
वो बा-वफ़ा हे हमसे,
ये मुस्ते-खाक दिल की,
उस पे निसार दे तु,
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