Sunday, 30 September 2012


साकीया,,,,,  आज मुजे नींद नही आयेगी,,,,
सुना हे तेरी महफिल में रत-जगा हे,,,,,,
आँखों आँखों में यूँ ही रात गुजर जायेगी ,,,,
सुना हे तेरी महफिल में रत-जगा हे,
शाकी हे और शाम भी , उल्फत का जाम भी,
तक़दीर हे उसी की जो ले उनसे काम भी,
रंगे महफिल हे रत भर के लिए,,,
सोचना क्या अभी सहेर के लिए,,,
तेरा जलवा हो तेरी सूरत हो,
और क्या चहियें नजर के लिए,,,,
आज सूरत तेरी बे -पर्दा नजर आयेगी,,,,
सुना हे तेरी महफिल में ,,,,,,,,,,,
मुहोब्बत में जो मिट जाता हे,,,
वो कुछ कैह् नही शकता,,,,
ये वो कूचा हे जहां दिल ,

दिल सलामत रह नही शकता,,,,,
किसकी दुनिया यहा तबाह नही,,,
कौन हे जिसके लब पे आह नही,,,,
वो सफर भी जरूर आयेगा ,,,,
जिससे बचाने की कोई राह् नही

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