Saturday, 13 October 2012


मोहे आई ना जग से लाज,
में इतनी जोर से नाची आज,
के घुँघरू टूट गए,,,,के ,,घुँघरू,,,टूट,,गए,,,,,
कुछ में नया जोबन भी था,
कुछ प्यार का पागल-पन भी था,
हर पलक बनी थी पीर मेरी,
ओर ज़ुल्फ बनी जंजीर मेरी,
लिया दिल साजन का जीत,
वो छेड़े पायल या ने गीत,,,,,के घुँघरू,,,,टूट,
में बसी थी जिनके सपनो में,
वो गिनेगा मुजे अपनो में,
केहती हे मेरी अँगड़ाई,
में प्रिया की नींद उड़ा लाई,
में बन के गई थी चोर,
मेरी पायल थी कमजोर,,के घुँघरू टूट,,,,,,
धरती पे ना मेरे पैर लगे,
बिन प्रिया मुजे सब गैर लगे,

मुजे अंग मिलें परवानो के,
ओर पंख मिलें अरमानो के,
जब मिला प्रिया का गाव,
तो ऐसे लचका मेरा पाव,,,के घुँघरू,,,,टूट,

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