Sunday, 21 October 2012


अजनबी शहेर के अजनबी रास्ते,
मेरी तन्हाइ पर मुस्कुराते रहे,,,,,,,
में बहुत देर तक यूँ ही चलता रहा,
तुम बहोत देर तक याद आते,,,,,,,,,
झहर मिलता रहा,झहर पीते रहे ,
रोज़ मरते रहे रोज़ जीते रहे,,
जिंदगी भी मुजे आजमाती रही,
और हम भी उसे आजमाते रहे,,,,
ज़ख्म जब भी कोई जेहनो दिल पर लगा,
जिन्दगी की तरफ़ एक दरीचा खुला,,,
हम भी गौया किसी, साज़ के तार हे,

चोट खाते रहे गून-गुनाते रहे,,,,
कल कुछ ऐसा हुआ में बहुत थक गया,
इस लिए सुनके भी अनसुने कर गया,
कितनी यादों के भटके हुए कारवा,
दिल के  ज्ख्मो के दर खट्-खताते रहे,,,,

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