इश्क में हम तुम्हे क्या बताये ,,,,
किस कदर चोट खाए हुए हे,,,,,,
मौत ने हमको मारा हे और हम,
जिन्दगी के सताये हुए हे,,,,,,,,,,,
उसने शादी का चोला पेहनकर.
शीर्फ चूमा था मेरे कफन को,
बस उसी दिन से जन्नत की हूरें,
मुजको दूल्हा बनाए हुए हे,,,,,
सुर्ख आँखों मे काजल लगा हे,
रुख पे वादा सजाये हुए हे,,,,
ऐसे आए हे मैयत पे मेरी,
जैसे शादी में आए हुये हे,,,,,
एहले हक्क अपनी मट्टी से पेहले ,
दाग लगाने ना पये कफन को,
आज ही हमाने बदले हे कपड़े ,
आज ही हम नहाये हुये हे,,,,
शराब इस लिए फील-हाल में नही पीता,
के नाप-तौल के पीना मुजे पसंद नही,
तेरे वजूद से अँगड़ाई लेके निकलेगा,
तो मैकदा जो अभी बोतलों में बाँध गई,
उनकी तारीफ क्या पूछते हो,
के उम्र सारी गुनाहों में गुजरी,
कारसा बन रहे हे वो ऐसे ,
जैसे गंगा नहाये हुए हे,
देख् साकी तेरे मै-कड़े का,
एक पहुँचा हुआ रिंद हूँ में,
जितने आए हे मैयत पे मेरी,
सब-के सब ही लगाए हुये हे,,,,,,
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