दिल दिया एतबार की हद थी,
जान दी ये मेरे प्यार की हद थी,
मर गया खुली रही आँखें मेरी,
ये तेरे इंतज़ार की हद थी,
जो फरेब मेने खाए, तुजे राजदॉ समजकर,
उन्हें कैसे भूल जाउ, एक दास्तॉ समजकर,
मुजे गौर से ना देखो में वो नामुराद दिल हूँ,
जिसे तूने रौंद डाल! एक बे-जुबान समजकर,
ना मिटा ओ ठोकरों से ये मझार हे किसीका,
जरा रेहमकर खुदारा किसीका निशाँ समजकर,,,,,
अरे ओ जलाने-वाले वो तेरा ही था नशेमन,,
जिसे तूने फूँक डाला मेरा आशियाँ समजकर,,
No comments:
Post a Comment