तेरी ग़ज़ल को यु भी आजमाके देख,
प्यार हे जिंदगी से तो, अज़ल को भी अपनाके देख
ओर ले कभी ,मज़ा भँवर में भी, डूबने का,
मजधार में ख़ुद को, कभी यु ही लहराके देख,
कि तुने अभी टूटे सफिनौ पे सफर किया ही नहीं,
कस्ति में चलने वाले कभी, समंदर से उलज़ के देख,
किनारे पे बैठ के नहीं, लगते मोती किसी के हाथ ,
हुनर हे तो , गोता लगा, ओर ख़ुद को डूबा के देख.
ओर दीये के उजाले में , सब-कुछ सुनहरा हे " मुकेश"
हमारी तरहा अंधेरो में, भी कभी जगमगाके देख,
प्यार हे जिंदगी से तो, अज़ल को भी अपनाके देख
ओर ले कभी ,मज़ा भँवर में भी, डूबने का,
मजधार में ख़ुद को, कभी यु ही लहराके देख,
कि तुने अभी टूटे सफिनौ पे सफर किया ही नहीं,
कस्ति में चलने वाले कभी, समंदर से उलज़ के देख,
किनारे पे बैठ के नहीं, लगते मोती किसी के हाथ ,
हुनर हे तो , गोता लगा, ओर ख़ुद को डूबा के देख.
ओर दीये के उजाले में , सब-कुछ सुनहरा हे " मुकेश"
हमारी तरहा अंधेरो में, भी कभी जगमगाके देख,
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