हे नारी,,,,,,,,,,,,,,,
तू शक्ति हे पर चंचल हे,
तुजसे ही ब्र्हमांड में सब हल-चल हे,
तुज बिन ये पुरुष शरीर भी "शव" हे,
पर :"सत्य " पौरुष" हे,
युगों से कल्पो से,
अचल हे,अडिग हे,
तेरा प्रयास हे , "पुरुष", {सत्यं}
चलित हो,
ओर जहां -तक ब्र्ह्मांड हे,
जीव-सृष्टि हे, तेरा प्रयास,
कभी सफल नही होगा,
प्रलय का देवता सब नष्ट कर शकता हे,
पर सत्यं को हिलने नही देगा,
क्योँकि वो सर्वोपरि हे,
बलिष्ठ अचल अडिग,
वो ही "राम" हे,
जो सत्य का अंश मात्र,
होने पर स्पर्श मात्र से अहल्या को,
पत्थर से चलित नारी कर शक्ता हे,
"सत्य' नारायण हे,
शायद इसी लिए वेद-व्यास जी ने,
राम को या क्रश्न को,
"सत्य" का अंशा अवतार होने पर,
"सत्य "के पूर्ण स्वरूप नारायण को ही,
सर्वोपरि दर्शाया हे,
"सत्य "को सर्वोपरिता दी हे
...........सत्यम् धी महि.........
तू शक्ति हे पर चंचल हे,
तुजसे ही ब्र्हमांड में सब हल-चल हे,
तुज बिन ये पुरुष शरीर भी "शव" हे,
पर :"सत्य " पौरुष" हे,
युगों से कल्पो से,
अचल हे,अडिग हे,
तेरा प्रयास हे , "पुरुष", {सत्यं}
चलित हो,
ओर जहां -तक ब्र्ह्मांड हे,
जीव-सृष्टि हे, तेरा प्रयास,
कभी सफल नही होगा,
प्रलय का देवता सब नष्ट कर शकता हे,
पर सत्यं को हिलने नही देगा,
क्योँकि वो सर्वोपरि हे,
बलिष्ठ अचल अडिग,
वो ही "राम" हे,
जो सत्य का अंश मात्र,
होने पर स्पर्श मात्र से अहल्या को,
पत्थर से चलित नारी कर शक्ता हे,
"सत्य' नारायण हे,
शायद इसी लिए वेद-व्यास जी ने,
राम को या क्रश्न को,
"सत्य" का अंशा अवतार होने पर,
"सत्य "के पूर्ण स्वरूप नारायण को ही,
सर्वोपरि दर्शाया हे,
"सत्य "को सर्वोपरिता दी हे
...........सत्यम् धी महि.........
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