जिन्दगी के अँगना में,
सपने बुआ ए, सपने बुआ ए,
बिटिया के किलकारी घर जब लाये,
सुनी झोपड़ी या में, दीपक जलाये ,
बंजर जमीनीया में अमृत बहाये,
लछ्मी को अपने छाती से लगाए, ,,ओ,,.हो...हो..ओ ...हो..हो.ओ,
गछीया पे अम्बुआके , फल जब आए,
पीहर भये अपने, नैहर पराये,
मइया के अंखीयोसे सरयू बहाये,
लछ्मी के अपने छाती से लगाए,
दोस्तों ये एक प्राइवेट लॉक गीत हे,
जो मेरे मित्र विशाल चतुर्वेदी ने डाइरेक्ट किया हे ओर ग्रुप की सारी जानकारी पोस्ट पे हे, हमारे देश की ये दुविधा हे के हम कोलावरी दी, पसंद कर लेते हे, पर अपनी जमीन , अपना लॉक संगीत जिसे हम आसानी से नही अपनाते,इस गाने के शब्द,ओर भाव को शांत मन से सुने, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ ये एक आवाज़ हे जिसे ज्यादा-से ज्यादा शेर करे
ओर अपना सहयोग प्रदान करे...............
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