Thursday, 12 July 2012

तोता उड,  तितली उड,
कौवा उड,  पेड़ उड,
कैह् जाना,  सामने वाले के,
पेड़ उड केहने पे भयभीत  हो जाना,
कल को ये पेड़ शायद उड जयेगा,
इनसान महेंगाइ में,
ओर क्या कर पायेगा,
लॉक तंत्र का मंतर अब जंगल में चलता हे,
ओर पेड़ तो क्या, अब आधा जंगल उड़ता हे
नेता अब कोंक्रीट का जंगल बना रहे हे,

बड़े ही निर्ममता से पेड़ों को कटवा रहे हे,
कल को गिने-चुने पेड़ "धरोहर" बन कर दिखेंगे,
जँगल में भी पेड़ अब सुरक्षित  नही रहेंगे,
गुना-भाग करते रहते हे पर्यावरण वाले,
बच्चो की पेड़ उड वाली,
उक्ति कोई उन्हें समजाये,

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