Tuesday, 19 March 2013

" दिल की चोटों ने कभी .. चैन से रहने न दिया... जब चली सर्द हवा ... मैंने तुझे याद किया ; इसका रोना नहीं.. क्यों तुमने किया .. दिल बरबाद... इसका ग़म है... कि बहुत देर में... बरबाद किया ; इतना मासूम हूँ फितरत से .. कली जब चटकी ... झुक के मैंने कहा .. मुझसे कुछ इरशाद किया ; मुझको तो होश नहीं ... तुमको खबर हो शायद ... लोग कहते हैं... कि तुमने मुझे बर्बाद किया ; वो तुझे याद करे ... जिसने भुलाया हो कभी ... हमने तुझ को न भुलाया.. न कभी याद किया..." ~~~~~~~~~~~~~ ' जोश मलीहाबादी '

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