" दिल की चोटों ने कभी .. चैन से रहने न दिया...
जब चली सर्द हवा ... मैंने तुझे याद किया ;
इसका रोना नहीं.. क्यों तुमने किया .. दिल बरबाद...
इसका ग़म है... कि बहुत देर में... बरबाद किया ;
इतना मासूम हूँ फितरत से .. कली जब चटकी ...
झुक के मैंने कहा .. मुझसे कुछ इरशाद किया ;
मुझको तो होश नहीं ... तुमको खबर हो शायद ...
लोग कहते हैं... कि तुमने मुझे बर्बाद किया ;
वो तुझे याद करे ... जिसने भुलाया हो कभी ...
हमने तुझ को न भुलाया.. न कभी याद किया..."
~~~~~~~~~~~~~ ' जोश मलीहाबादी '
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