जिंदगी मेरी थी लेकिन, पराइ निकली,
हकीकत ख्वाब से बढकर ,सवाइ निकली,रग-रग में बसाके था, पूजा जिसको,
वो बडी जालिम-ज़ालिम हरजाई निकली,
होके हमराह ता-उम्र तुजे पा ना शके,
अजीब तेरी हिजाब-आराई निकली,
हर-एक चीज गिरेबॉ में, समाने वाली,
तेरी हर आरज़ू "मुकेश" सौदाई निकली
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